CBSE Class 10 Hindi Course B Sample Paper 2025 Standard Set 1 with Solutions
This official-pattern CBSE Class 10 Hindi Sample Paper for Course B (Subject Code 085) with step-by-step solutions is designed to give board examinees an authentic simulation of the upcoming board examination. Practicing with a dedicated CBSE sample paper 2025 Hindi enables students to master the updated question typology, internal choices, and strict word limits mandated by the Central Board of Secondary Education. Whether you are solving a CBSE sample paper standard set or targeting specific weaknesses with a CBSE mock paper, this verified CBSE Hindi sample paper with solutions breaks down every section—from applied grammar to literature and creative composition—with precise marking criteria to help you secure a 95+ score.
Sample Paper Format
The CBSE Class 10 Hindi Course B examination evaluates students across four distinct functional competencies: reading comprehension, applied grammatical accuracy, textbook analytical depth, and structured creative writing. The question paper carries a total of 80 marks with a time duration of 3 hours (180 minutes), preceded by an additional 15 minutes of non-writing reading time.
| Section (खंड) | Focus Area (विषय क्षेत्र) | Question Format | Total Marks |
|---|---|---|---|
| खंड 'क' (Section A) | अपठित बोध (Unseen Comprehension) | 2 Unseen Passages (MCQs & Short Descriptive) | 14 Marks |
| खंड 'ख' (Section B) | व्यावहारिक व्याकरण (Applied Grammar) | Objective & Transformation Questions (16 of 20) | 16 Marks |
| खंड 'ग' (Section C) | पाठ्यपुस्तक व पूरक पुस्तक (Sparsh & Sanchayan) | Extract-based, Short & Long Answer Questions | 30 Marks |
| खंड 'घ' (Section D) | रचनात्मक लेखन (Creative & Functional Writing) | Paragraph, Formal Letter, Notice, Ad, Email/Story | 20 Marks |
| Total Marks | 80 Marks | ||
Core Grammar Concept Breakdown: Padbandh Identification Framework
In Section B, applied grammar accounts for 16 marks across four specific topics: Padbandh (4 marks), Vakya Roopantaran (4 marks), Samas (4 marks), and Muhavare (4 marks). Scoring full marks in grammar requires understanding algorithmic parsing rules rather than rote memorization. The functional structural formula for पदबंध (Phrase) identification is defined below:
पदबंध सूत्र (Rule): [आश्रित पद (Dependent Modifiers)] + शीर्ष पद (Head Word) = पदबंध का प्रकार (Type of Phrase)
- संज्ञा पदबंध (Noun Phrase): If the underlined segment ends on a noun (संज्ञा) which acts as the headword. उदाहरण: 'अयोध्या के राजा दशरथ के चार पुत्र थे।' (शीर्ष पद = 'दशरथ' [संज्ञा] → संज्ञा पदबंध)
- सर्वनाम पदबंध (Pronoun Phrase): If the underlined segment terminates at a pronoun. उदाहरण: 'कक्षा में सबसे शांत बैठने वाले तुम आज इतने उग्र क्यों हो?' (शीर्ष पद = 'तुम' [सर्वनाम] → सर्वनाम पदबंध)
- विशेषण पदबंध (Adjective Phrase): If the underlined group of words qualifies a subsequent noun/pronoun without including the head noun itself. उदाहरण: 'वह बहुत मीठे और रसीले आम लाया।' (विशेषता बताने वाले पद → विशेषण पदबंध)
- क्रिया पदबंध (Verb Phrase): Formed by the principal verb combined with auxiliary and aspectual verbs. उदाहरण: 'बालक मैदान में दौड़ता चला जा रहा है।' (मुख्य क्रिया + सहायक क्रियाएँ → क्रिया पदबंध)
- क्रियाविशेषण (अव्यय) पदबंध (Adverbial Phrase): Modifies a verb by indicating manner, time, place, or degree. उदाहरण: 'कछुआ बहुत धीमी गति से आगे बढ़ता रहा।' (चलने की रीति → क्रियाविशेषण पदबंध)
Mastering this parsing algorithm eliminates ambiguity when navigating tricky questions in any standard CBSE practice paper.
Complete Sample Paper with Solutions
खंड 'क' : अपठित बोध (14 अंक)
प्रश्न 1: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर दीजिए: (7 अंक)
"सच्चा उत्साह वही होता है जो मनुष्य को निस्वार्थ भाव से कर्मक्षेत्र में प्रवृत्त करता है। जब किसी कार्य का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत लाभ, यश या भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति होता है, तब उसमें उत्पन्न स्फूर्ति अस्थायी होती है। वास्तविक कर्मवीर वह है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों से डिगता नहीं। स्वावलंबन और आत्मसंयम उसके दो सशक्त संबल होते हैं। आज के तकनीकी युग में सूचनाओं का अंबार है, परंतु विवेक और नैतिक मूल्यों के अभाव में यह ज्ञान मनुष्य को एकाकी और स्वार्थी बना रहा है। समाज के निर्माण के लिए ज्ञान के साथ संवेदना का समन्वय अनिवार्य है। जब तक हमारी उपलब्धियाँ समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन नहीं लातीं, तब तक वे अधूरी हैं।"
(i) सच्चे उत्साह की प्रमुख कसौटी क्या बताई गई है? (1 अंक)
(क) भौतिक सुख-सुविधाओं की प्रचुर प्राप्ति
(ख) व्यक्तिगत यश और सामाजिक प्रतिष्ठा का अर्जन
(ग) निस्वार्थ भाव से जनकल्याणकारी कर्म में प्रवृत्त होना
(घ) विषम परिस्थितियों से पलायन करना
उत्तर: (ग) निस्वार्थ भाव से जनकल्याणकारी कर्म में प्रवृत्त होना।
व्याख्या: गद्यांश की प्रथम पंक्ति के अनुसार सच्चा उत्साह व्यक्ति को स्वार्थ रहित होकर कर्तव्य पथ पर अग्रसर करता है।
(ii) आधुनिक तकनीकी युग की प्रमुख विडंबना क्या है? (2 अंक)
उत्तर: आधुनिक युग की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज सूचनाओं और ज्ञान का अथाह भंडार उपलब्ध है, परंतु मानवीय संवेदना, विवेक और नैतिक मूल्यों की कमी के कारण यह ज्ञान मनुष्य को आत्मकेंद्रित, एकाकी और स्वार्थी बना रहा है।
(iii) 'कर्मवीर' के दो सशक्त संबल किन्हें कहा गया है और क्यों? (2 अंक)
उत्तर: कर्मवीर के दो सशक्त संबल स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) और आत्मसंयम (इंद्रिय संयम) हैं। ये गुण व्यक्ति को विपरीत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी विचलित हुए बिना अपने नैतिक आदर्शों पर अडिग रहने की आंतरिक शक्ति प्रदान करते हैं।
(iv) गद्यांश के अनुसार किसी भी वैज्ञानिक या सामाजिक उपलब्धि की वास्तविक सार्थकता किसमें निहित है? (2 अंक)
उत्तर: उपलब्धि की वास्तविक सार्थकता तब सिद्ध होती है जब वह समाज के वंचित, शोषित अथवा अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक और गुणात्मक परिवर्तन लाने में समर्थ हो। केवल व्यक्तिगत समृद्धि उपलब्धि की सार्थकता का मापदंड नहीं हो सकती।
प्रश्न 2: निम्नलिखित द्वितीय अपठित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (7 अंक)
"प्रकृति और मानव का संबंध सनातन है। आदिम काल से ही वृक्ष, नदियाँ और पर्वत मनुष्य के सहचर रहे हैं। भारतीय संस्कृति में प्रकृति को केवल उपभोग की वस्तु न मानकर मातृस्वरूपा माना गया है। हमने नदियों को 'लोकमाता' और वृक्षों को 'देवता' का स्वरूप देकर उनकी आराधना की। परंतु अनियंत्रित औद्योगीकरण और अंधाधुंध उपभोक्तावादी संस्कृति ने इस संतुलन को ध्वस्त कर दिया है। वनों का विनाश, नदियों का प्रदूषण और वायुमंडल में बढ़ता कार्बन उत्सर्जन केवल पर्यावरण संकट नहीं हैं, बल्कि यह मानवीय अस्तित्व के सम्मुख उपस्थित महाविनाश की चेतावनी हैं। यदि हमें भावी पीढ़ियों के लिए इस पृथ्वी को सुरक्षित रखना है, तो संधारणीय विकास (Sustainable Development) और प्राकृतिक संपदा के विवेकपूर्ण दोहन को अपनी जीवनशैली का अभिन्न अंग बनाना ही होगा।"
(i) भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति कैसा दृष्टिकोण रखा गया है? (2 अंक)
उत्तर: भारतीय संस्कृति में प्रकृति के प्रति आत्मीय, श्रद्धामय और कृतज्ञता का दृष्टिकोण रहा है। यहाँ प्रकृति को उपभोग्य वस्तु न मानकर 'माता' का दर्जा दिया गया है, जहाँ नदियों को लोकमाता और वृक्षों को जीवनदाता देवस्वरूप मानकर उनका संरक्षण किया गया।
(ii) वर्तमान पर्यावरणीय असंतुलन के दो मुख्य कारण गद्यांश के आलोक में स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
उत्तर: पर्यावरणीय असंतुलन के दो प्रमुख कारण हैं: (1) अनियंत्रित और अनियोजित औद्योगीकरण तथा (2) आधुनिक मनुष्य की अंधी उपभोक्तावादी प्रवृत्ति, जिसके कारण वनों का अंधाधुंध कटान और प्राकृतिक संसाधनों का अतिदोहन हो रहा है।
(iii) 'संधारणीय विकास' (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) से क्या अभिप्राय है? (2 अंक)
उत्तर: संधारणीय विकास से तात्पर्य ऐसे संतुलित आर्थिक और सामाजिक विकास से है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करे जिससे भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरण की शुद्धता से कोई समझौता न करना पड़े।
(iv) 'उपभोक्तावादी' शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग, मूल शब्द और प्रत्यय पृथक कीजिए। (1 अंक)
उत्तर:
उपसर्ग: उप | मूल शब्द: भोग | प्रत्यय: ता + वादी (या मूल शब्द 'उपभोग' + प्रत्यय 'ता' + 'वादी')।
खंड 'ख' : व्यावहारिक व्याकरण (16 अंक)
प्रश्न 3: पदबंध पर आधारित निम्नलिखित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर दीजिए: (4 × 1 = 4 अंक)
- 'दुकान पर खड़ा धोती-कुर्ता पहने वह दुबला-पतला व्यक्ति अध्यापक है।' रेखांकित पदबंध का भेद बताइए।
उत्तर: संज्ञा पदबंध (रेखांकित अंश का अंतिम और मुख्य पद 'व्यक्ति' जातिवाचक संज्ञा है, जिस पर सभी विशेषण पद आश्रित हैं)। - 'नदी की तेज धारा में नाव धीरे-धीरे बहती जा रही है।' रेखांकित पदबंध का भेद बताइए।
उत्तर: क्रिया पदबंध (मुख्य क्रिया 'बहना' के साथ 'जा रही है' सहायक क्रियाएँ मिलकर क्रिया पदबंध की रचना कर रही हैं)। - 'तताँरा की तलवार लकड़ी की होने पर भी अद्भुत दैवीय शक्ति से युक्त थी।' रेखांकित पदबंध का भेद बताइए।
उत्तर: विशेषण पदबंध (यह संपूर्ण पदसमूह तलवार की विशेषता प्रकट कर रहा है)। - 'विपत्ति के समय धैर्य और संयम से काम लेने वाले आप क्यों घबरा रहे हैं?' रेखांकित पदबंध पहचानिए।
उत्तर: सर्वनाम पदबंध (शीर्ष पद 'आप' सर्वनाम है)। - 'घायल सिपाही रेंगते-रेंगते झाड़ियों की ओट में छिप गया।' रेखांकित पदबंध का प्रकार लिखिए।
उत्तर: क्रियाविशेषण पदबंध (यह पदसमूह छिपने की क्रिया की रीति और स्थान की विशेषता बता रहा है)।
प्रश्न 4: रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण के किन्हीं चार प्रश्नों को हल कीजिए: (4 × 1 = 4 अंक)
- 'सूर्योदय होते ही पक्षियों का मधुर कलरव गूँजने लगा।' (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
उत्तर: सूर्योदय हुआ और पक्षियों का मधुर कलरव गूँजने लगा।
नियम: दो स्वतंत्र उपवाक्यों को समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय 'और' से जोड़ा गया है। - 'जो व्यक्ति परिश्रमी होते हैं, वे जीवन में कभी असफल नहीं होते।' (सरल वाक्य में रूपांतरित कीजिए)
उत्तर: परिश्रमी व्यक्ति जीवन में कभी असफल नहीं होते।
नियम: आश्रित उपवाक्य को हटाकर एक ही उद्देश्य और एक ही मुख्य समापिका क्रिया में रूपांतरित किया गया। - 'अध्यापक के कक्षा में प्रवेश करते ही सभी छात्र शांत हो गए।' (मिश्र वाक्य में बदलिए)
उत्तर: जैसे ही अध्यापक ने कक्षा में प्रवेश किया, वैसे ही सभी छात्र शांत हो गए। (अथवा: 'जब अध्यापक कक्षा में आए, तब सभी छात्र शांत हो गए।') - 'वह बाज़ार गया और उसने अपने लिए नई पुस्तकें खरीदीं।' (सरल वाक्य में बदलिए)
उत्तर: उसने बाज़ार जाकर अपने लिए नई पुस्तकें खरीदीं। ('पूर्वकालिक क्रिया' 'जाकर' का प्रयोग कर सरल वाक्य बनाया गया)। - 'जब घंटी बजी, तब सभी छात्र अपनी-अपनी कक्षाओं की ओर दौड़ पड़े।' (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
उत्तर: घंटी बजी और सभी छात्र अपनी-अपनी कक्षाओं की ओर दौड़ पड़े।
प्रश्न 5: समास पर आधारित किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (4 × 1 = 4 अंक)
- 'यथाशक्ति' का समास विग्रह कर समास का नाम बताइए।
उत्तर: समास विग्रह: शक्ति के अनुसार | समास का नाम: अव्ययीभाव समास (पूर्व पद 'यथा' अव्यय है)। - 'त्रिलोचन' समस्त पद का विग्रह कर समास का नाम लिखिए।
उत्तर: समास विग्रह: तीन हैं लोचन (नेत्र) जिसके अर्थात् शिव | समास का नाम: बहुव्रीहि समास (दोनों पद मिलकर अन्य पद 'शिव' की ओर संकेत करते हैं)। - 'विद्या रूपी धन' का समस्त पद बनाइए और समास का नाम लिखिए।
उत्तर: समस्त पद: विद्याधन | समास का नाम: कर्मधारय समास (उपमान-उपमेय का संबंध)। - 'देशभक्ति' का सही समास विग्रह और भेद क्या होगा?
उत्तर: समास विग्रह: देश के लिए भक्ति | समास का भेद: संप्रदान तत्पुरुष समास। - 'माता-पिता' समस्त पद में कौन-सा समास है? विग्रह सहित लिखिए।
उत्तर: समास विग्रह: माता और पिता | समास का नाम: द्वंद्व समास (दोनों पद प्रधान हैं)।
प्रश्न 6: मुहावरों पर आधारित किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (4 × 1 = 4 अंक)
- 'दाँतों तले उँगली दबाना' मुहावरे का उपयुक्त अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
अर्थ: आश्चर्यचकित या चकित रह जाना।
वाक्य प्रयोग: सर्कस में नन्हे बालक के हैरतअंगेज़ करतब देखकर सभी दर्शकों ने दाँतों तले उँगली दबा ली। - 'अंधे की लाठी होना' का अर्थ स्पष्ट करते हुए रिक्त स्थान भरिए:
"वृद्धावस्था में इकलौता पुत्र श्रवण कुमार अपने माता-पिता के लिए ............... था।"
उत्तर: अंधे की लाठी (अर्थ: एकमात्र सहारा होना)। - 'गांठ बाँधना' मुहावरे का क्या अर्थ है?
उत्तर: अच्छी तरह याद रखना / पक्का निश्चय करना। - 'ईंट का जवाब पत्थर से देना' मुहावरे का सार्थक वाक्य प्रयोग कीजिए।
उत्तर: अर्थ: कड़ा मुकाबला करना / दुष्ट के साथ कठोरता से पेश आना।
वाक्य प्रयोग: भारतीय सेना ने सीमा पर घुसपैठ की कोशिश कर रहे आतंकियों को ईंट का जवाब पत्थर से दिया। - 'सुध-बुध खोना' मुहावरे का सही अर्थ क्या है?
उत्तर: अपने आपे में न रहना / अत्यधिक मुग्ध अथवा विचलित हो जाना।
खंड 'ग' : पाठ्यपुस्तक स्पर्श भाग-2 एवं संचयन भाग-2 (30 अंक)
प्रश्न 7: निम्नलिखित पठित काव्यांश (स्पर्श भाग-2: 'पर्वत प्रदेश में पावस' - सुमित्रानंदन पंत) को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (5 × 1 = 5 अंक)
"सहस्र दृग-सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे जल में निज महाकार,
जिसके चरणों में पला ताल
दर्पण-सा फैला है विशाल!"
- 'सहस्र दृग-सुमन' से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: पर्वत पर खिले हुए हजारों पुष्प, जो पर्वत के हजार नेत्रों के समान प्रतीत हो रहे हैं। यहाँ रूपक एवं मानवीकरण अलंकार का जीवंत प्रयोग है। - पर्वत अपने किस रूप को देख रहा है और कहाँ देख रहा है?
उत्तर: पर्वत अपने विशालकाय रूप ('महाकार') को अपने चरणों में स्थित स्वच्छ, शांत और दर्पण के समान निर्मल तालाब के जल में देख रहा है। - तालाब की तुलना किससे की गई है और क्यों?
उत्तर: तालाब की तुलना 'दर्पण' (शीशे) से की गई है क्योंकि उसका जल इतना स्वच्छ, पारदर्शी और स्थिर है कि उसमें पर्वत का विशाल प्रतिबिंब स्पष्ट दिखाई दे रहा है। - इस काव्यांश में प्रकृति के किस रूप का चित्रण हुआ है?
उत्तर: मानवीकृत सजीव रूप का। कवि ने जड़ पर्वत और तालाब में मानवीय भावनाओं और क्रियाकलापों का आरोपण किया है। - 'दर्पण-सा फैला है विशाल' पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
उत्तर: उपमा अलंकार (साधम्र्य वाचक शब्द 'सा' के कारण)।
प्रश्न 8: पद्य खंड के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के विश्लेषणात्मक उत्तर दीजिए: (2 × 3 = 6 अंक)
(क) 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि मैथिलीशरण गुप्त ने मनुष्य जीवन की सार्थकता किसमें मानी है? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार केवल जीवित रहना या पशुओं की भाँति अपनी उदरपूर्ति करना मनुष्यता नहीं है। सच्चा मनुष्य वही है जो संपूर्ण मानव जाति को अपना परिवार समझे और परोपकार, त्याग तथा विश्वबंधुत्व की भावना के लिए सहर्ष आत्मबलिदान देने को तत्पर रहे। कवि ने दधीचि (जिन्होंने देवताओं के कल्याण हेतु अपनी अस्थियाँ दान दीं), राजा शिवि (जिन्होंने कबूतर की रक्षा हेतु अपने शरीर का मांस दे दिया) और कर्ण (जिन्होंने कुंडल-कवच दान दिया) जैसे महापुरुषों का उदाहरण देकर सिद्ध किया है कि मृत्यु के उपरांत भी वही व्यक्ति अमर होता है जिसका जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित हो।
(ख) 'तोप' कविता (वीरेन डंगवाल) वर्तमान समाज को क्या ऐतिहासिक संदेश देती है? कंपनी बाग के मुहाने पर रखी तोप की वर्तमान स्थिति का उल्लेख कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: वीरेन डंगवाल की कविता 'तोप' यह ऐतिहासिक सत्य उद्घाटित करती है कि शक्ति और क्रूरता का कोई भी साधन कभी चिरस्थायी नहीं होता। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में जिस तोप ने अनगिनत देशभक्त वीरों की धज्जियाँ उड़ा दी थीं, आज वही तोप 180 डिग्री उलटकर बच्चों की घुड़सवारी और चिड़ियों (विशेषकर गौरैयों) की क्रीड़ास्थली बन चुकी है। यह कविता संदेश देती है कि चाहे अत्याचारी शासक कितना भी दंभी क्यों न हो, एक दिन उसकी निरंकुश सत्ता का अंत अवश्य होता है।
प्रश्न 9: निम्नलिखित पठित गद्यांश (स्पर्श भाग-2: 'बड़े भाई साहब' - मुंशी प्रेमचंद) को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (5 × 1 = 5 अंक)
"भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया; लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद खूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान पायेदार कैसे बने?"
- लेखक और उनके बड़े भाई साहब की उम्र और कक्षा में क्या अंतर था?
उत्तर: बड़े भाई साहब लेखक से उम्र में पाँच वर्ष बड़े थे, परंतु कक्षा में केवल तीन दर्जे (कक्षाएँ) आगे थे। - 'तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे' - इस व्यंग्योक्ति का वास्तविक अर्थ क्या है?
उत्तर: इसका वास्तविक अभिप्राय यह है कि बड़े भाई साहब बार-बार कक्षा में अनुत्तीर्ण (फेल) हो जाते थे, जिसे वे अपनी पढ़ाई की 'गंभीरता और गहरी बुनियाद' का आवरण पहनाकर उचित ठहराने का प्रयास करते थे। - 'बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान पायेदार कैसे बने?' - यहाँ बड़े भाई साहब का क्या तर्क था?
उत्तर: भाई साहब का मानना था कि शिक्षा रूपी महल को टिकाऊ बनाने के लिए प्राथमिक ज्ञान की नींव अत्यंत ठोस होनी चाहिए, इसलिए वे हर कक्षा में कई वर्ष लगाकर पढ़ते थे। - इस पाठ में लेखक ने तत्कालीन शिक्षा प्रणाली की किस खामी पर चोट की है?
उत्तर: रटंत विद्या (Rote Learning), विषय की वास्तविक समझ के अभाव तथा परीक्षा-केंद्रित अव्यावहारिक शिक्षा प्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है। - गद्यांश में प्रयुक्त 'पुख्ता' और 'पायेदार' शब्दों के अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'पुख्ता' का अर्थ है मजबूत/पक्की, तथा 'पायेदार' का अर्थ है टिकाऊ/स्थायी।
प्रश्न 10: गद्य खंड के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2 × 3 = 6 अंक)
(क) 'झेन की देन' पाठ में जापानी जीवनशैली में 'टी-सेरेमनी' (चा-नो-यू) की क्या उपयोगिता बताई गई है? वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी में इसका क्या महत्व है? (3 अंक)
उत्तर: जापान में अत्यधिक मानसिक तनाव और निरंतर आगे निकलने की होड़ के कारण कई लोग मनोरोग के शिकार हो जाते हैं। 'टी-सेरेमनी' (चा-नो-यू) एक ऐसा आध्यात्मिक अनुष्ठान है जहाँ अत्यंत शांत वातावरण में तीन लोग बैठकर धीमी गति से चाय की चुस्कियाँ लेते हैं। वहाँ की नीरवता व्यक्ति को अतीत की स्मृतियों और भविष्य की चिंताओं से मुक्त कर 'वर्तमान क्षण' (Present Moment) में जीना सिखाती है। वर्तमान भागदौड़ भरी जिंदगी में यह पद्धति मानसिक शांति, तनावमुक्ति और आत्म-साक्षात्कार के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रासंगिक है।
(ख) वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था। 'कारतूस' पाठ के आधार पर उसकी चारित्रिक विशेषताओं को प्रमाणित कीजिए। (3 अंक)
उत्तर: वज़ीर अली एक निर्भीक, स्वाभिमानी, कुशल रणनीतिकार और कट्टर देशभक्त था। उसके दिल में अंग्रेजों के विरुद्ध तीव्र नफ़रत थी। उसने अवध के तख्त से हटाए जाने के बाद भी हार नहीं मानी। उसने कंपनी के वकील की बदतमीजी पर उसे उसी के घर में कत्ल कर दिया और जंगलों में रहकर अंग्रेजों को छकाता रहा। उसकी जाँबाज़ी का चरमोत्कर्ष तब देखने को मिलता है जब वह अकेले ही ब्रिटिश कर्नल के खेमे में घुसकर स्वयं कर्नल से ही कारतूस हासिल कर लेता है और अपना असली नाम बताकर निडरता से वहाँ से निकल जाता है।
प्रश्न 11: पूरक पाठ्यपुस्तक 'संचयन भाग-2' पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के विस्तृत उत्तर लिखिए: (2 × 4 = 8 अंक)
(क) 'हरिहर काका' कहानी आधुनिक समाज में रिश्तों के गिरते नैतिक मूल्यों और धार्मिक संस्थाओं के पाखंड को किस प्रकार उजागर करती है? सविस्तार समीक्षा कीजिए। (4 अंक)
उत्तर: मिथलेश्वर द्वारा रचित 'हरिहर काका' वर्तमान समाज में स्वार्थ, अर्थलोलुपता और रिश्तों के विघटन की अत्यंत मर्मस्पर्शी गाथा है।
1. पारिवारिक स्वार्थ: हरिहर काका के सगे भाई केवल उनकी पंद्रह बीघे उपजाऊ ज़मीन हथियाने के लिए उनकी सेवा का दिखावा करते हैं। जब काका ज़मीन लिखने से मना करते हैं, तो वे ही भाई काका को बंधक बनाकर मारते-पीटते हैं और जबरन अँगूठे के निशान लेते हैं। यहाँ रक्त-संबंधों की आत्मीयता संपत्ति के लालच में पूरी तरह विलुप्त हो जाती है।
2. धार्मिक संस्थाओं का घिनौना चेहरा: ठाकुरबारी के महंत और साधु समाज के आध्यात्मिक मार्गदर्शक होने का ढोंग करते हैं, परंतु वास्तव में वे गिद्धों की तरह काका की ज़मीन पर नज़र गड़ाए हुए हैं। वे काका का अपहरण करवाते हैं, उनके मुँह में कपड़ा ठूँसकर अमानवीय यातनाएँ देते हैं।
इस प्रकार कहानी प्रमाणित करती है कि आज समाज में प्रेम और सम्मान का आधार मानवीय रिश्ते या धर्म नहीं, बल्कि केवल 'निजी स्वार्थ और धन' बनकर रह गया है।
(ख) 'टोपी शुक्ला' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि बालमन पर धर्म, जाति और संप्रदाय की संकीर्ण सीमाओं का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। टोपी और इफ़्फ़न की दादी का भावनात्मक रिश्ता इसका प्रमाण कैसे है? (4 अंक)
उत्तर: राही मासूम रज़ा की कृति 'टोपी शुक्ला' यह सिद्ध करती है कि बालमन केवल निश्छल प्रेम और अपनत्व की भाषा समझता है। टोपी एक कट्टर और रूढ़िवादी हिंदू परिवार का बेटा है, जबकि उसका अभिन्न मित्र इफ़्फ़न एक मुस्लिम परिवार से संबंध रखता है।
टोपी को अपने घर में माँ और दादी से वह स्नेह और वात्सल्य नहीं मिलता, जो उसे इफ़्फ़न की दादी से प्राप्त होता है। इफ़्फ़न की दादी की पूर्वी बोली, उनकी आत्मीयता और प्यार भरी बातें टोपी के एकाकी हृदय को तृप्त कर देती हैं। टोपी को कभी यह अहसास नहीं हुआ कि इफ़्फ़न की दादी दूसरे धर्म की हैं। जब इफ़्फ़न की दादी का देहांत होता है, तो टोपी का रो-रोकर बुरा हाल हो जाता है और वह कहता है कि काश इफ़्फ़न की दादी की जगह उसकी अपनी दादी मर गई होती। यह प्रसंग स्पष्ट करता है कि सच्चा मानवीय प्रेम जाति, धर्म और संप्रदाय की तमाम कृत्रिम दीवारों से परे होता है।
खंड 'घ' : रचनात्मक लेखन (20 अंक)
प्रश्न 12: दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 100-120 शब्दों में सारगर्भित अनुच्छेद लिखिए: (5 अंक)
विषय: डिजिटल भारत और युवा पीढ़ी
संकेत बिंदु: • भूमिका एवं तकनीकी क्रांति • युवाओं पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव • भविष्य की चुनौतियाँ एवं समाधान
मॉडल उत्तर (अनुच्छेद):
डिजिटल भारत और युवा पीढ़ी
सूचना और प्रौद्योगिकी के अभूतपूर्व विकास ने आज भारत को 'डिजिटल इंडिया' के सशक्त वैश्विक मंच पर स्थापित कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट और स्मार्ट उपकरणों ने देश की युवा पीढ़ी की कार्यशैली, शिक्षा और जीवन दृष्टिकोण में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। आज का युवा घर बैठे विश्वस्तरीय ई-लर्निंग सामग्री, ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल स्टार्टअप्स और वैश्विक शोध से जुड़ रहा है। डिजिटल साक्षरता ने स्वरोज़गार और नवाचार के असीम द्वार खोले हैं। परंतु इस सिक्के का दूसरा पहलू अत्यंत चिंताजनक है। स्क्रीन पर अत्यधिक समय व्यतीत करने से युवाओं में शारीरिक सुस्ती, मानसिक अवसाद, साइबर अपराध और एकाकीपन जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ रही हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध अनावश्यक सूचनाओं के भँवर में युवा अपनी मौलिक रचनात्मकता खोते जा रहे हैं। अतः आवश्यकता इस बात की है कि तकनीक को साधन माना जाए, साध्य नहीं। युवा डिजिटल संसाधनों का उपयोग अपने ज्ञानवर्धन और कौशल विकास के लिए करें, न कि आभासी दुनिया के व्यसन में फँसने के लिए। जब विवेक और तकनीक का संतुलन बनेगा, तभी डिजिटल भारत का स्वप्न साकार होगा।
प्रश्न 13: औपचारिक पत्र लेखन (लगभग 100 शब्द) (5 अंक)
प्रश्न: अपने क्षेत्र के नगर निगम स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर वर्षा ऋतु के पश्चात मोहल्ले में जलभराव और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से उत्पन्न मलेरिया/डेंगू की रोकथाम हेतु फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव की व्यवस्था करने का अनुरोध कीजिए।
मॉडल उत्तर (औपचारिक पत्र):
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली - 1100XX
दिनांक: 15 मार्च 2025
सेवा में,
मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी,
पूर्वी दिल्ली नगर निगम,
दिल्ली - 110092
विषय: मोहल्ले में जलभराव तथा मच्छरों के प्रकोप की रोकथाम हेतु फॉगिंग एवं कीटनाशक छिड़काव के संबंध में।
महोदय,
मैं इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान विकास मार्ग, शकरपुर क्षेत्र में उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ। हाल ही में हुई बेमौसम भारी वर्षा के कारण हमारे संपूर्ण क्षेत्र की नालियाँ अवरुद्ध हो गई हैं और सड़कों तथा खाली पड़े भूखंडों पर गंदा पानी जमा हो गया है।
इस दूषित और ठहरे हुए जल के कारण क्षेत्र में मच्छरों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है। मोहल्ले में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। कई छोटे बच्चे और बुजुर्ग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी भय व्याप्त है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए अविलंब हमारे क्षेत्र में कीटनाशक दवाओं (डीडीटी आदि) का छिड़काव करवाएं तथा नियमित फॉगिंग की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करें।
सधन्यवाद।
भवदीय,
क. ख. ग.
(सचेत नागरिक एवं अध्यक्ष, रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन)
प्रश्न 14: सूचना लेखन (लगभग 50 शब्द) (4 अंक)
प्रश्न: आप अपने विद्यालय के छात्र कल्याण परिषद के सचिव हैं। विद्यालय में आयोजित होने वाले वार्षिक 'पुस्तक मेला एवं पुस्तक दान पखवाड़े' के संबंध में छात्रों के लिए एक सूचना तैयार कीजिए।
मॉडल उत्तर (सूचना प्रारूप):
सूचना
दिनांक: 18 मार्च 2025
सभी विद्यार्थियों को सूचित किया जाता है कि हमारे विद्यालय के प्रांगण में आगामी 25 मार्च से 27 मार्च 2025 तक प्रातः 9:00 बजे से सायं 3:00 बजे तक त्रिदिवसीय 'वार्षिक पुस्तक मेले' का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में राष्ट्रीय स्तर के प्रकाशकों की शैक्षणिक, साहित्यिक एवं प्रेरणादायी पुस्तकें रियायती दरों पर उपलब्ध रहेंगी।
इसके साथ ही, जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता हेतु 'पुस्तक दान शिविर' भी लगाया जा रहा है। इच्छुक छात्र अपनी पुरानी, उपयोगी पुस्तकें दान पेटी में जमा कर सकते हैं। अधिक जानकारी हेतु अधोहस्ताक्षरी से संपर्क करें।
रोहन वर्मा
(सचिव, छात्र कल्याण परिषद)
प्रश्न 15: विज्ञापन लेखन (लगभग 50 शब्द) (3 अंक)
प्रश्न: 'हरित क्रांति' संस्था द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु तैयार किए गए 'प्राकृतिक जूट व कपड़े के थैलों' की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन तैयार कीजिए।
मॉडल उत्तर (विज्ञापन):
★ पॉलिथीन को कहें 'ना', प्रकृति से जोड़ें नाता! ★
'प्रकृति' जूट एवं सूती थैले
विशेषताएँ:
- ✓ 100% पर्यावरण अनुकूल, टिकाऊ और आकर्षक डिज़ाइन
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मूल्य: मात्र &rupee;30 से प्रारंभ | संपर्क: हरित संगम केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली | फोन: 98765XXXXX
प्रश्न 16: ई-मेल लेखन (लगभग 100 शब्द) (3 अंक)
प्रश्न: विद्यालय में खेल सामग्री की कमी की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए प्रधानाचार्य को अतिरिक्त खेल सामग्री मंगवाने हेतु एक औपचारिक ई-मेल लिखिए।
मॉडल उत्तर (ई-मेल प्रारूप):
To: principal.dpsvihar@school.edu.in
CC/BCC: sportsdept@school.edu.in
Subject: विद्यालय में अतिरिक्त खेल सामग्री उपलब्ध कराने के संबंध में
आदरणीय महोदय,
सादर प्रणाम।
मैं कक्षा 10 'ब' का छात्र एवं विद्यालय की खेल समिति का प्रतिनिधि आपका ध्यान विद्यालय के क्रीड़ा विभाग में खेल उपकरणों की कमी की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ। आगामी माह में अंतर-विद्यालयीय खेल प्रतियोगिताएँ प्रस्तावित हैं, जिनमें हमारे विद्यालय की क्रिकेट, बास्केटबॉल और बैडमिंटन टीमें भाग ले रही हैं।
वर्तमान में अभ्यास सत्र हेतु पर्याप्त संख्या में क्रिकेट बैट, लेदर बॉल, बास्केटबॉल और बैडमिंटन रैकेट उपलब्ध नहीं हैं। उपलब्ध सामग्रियों में से कई उपकरण टूट-फूट चुके हैं, जिससे खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास में भारी व्यवधान आ रहा है।
अतः आपसे सादर अनुरोध है कि खिलाड़ियों के उज्ज्वल प्रदर्शन और अभ्यास को सुचारु बनाए रखने हेतु क्रीड़ा विभाग में शीघ्र अति शीघ्र नई खेल सामग्री उपलब्ध कराने की कृपा करें।
सधन्यवाद।
विनीत,
अमन शर्मा
(कक्षा प्रतिनिधि एवं खेल कप्तान, कक्षा 10 'ब')
Difficulty Analysis
A rigorous review of this standard paper reveals the distribution of cognitive challenges aligned with recent CBSE board trends:
| Section | Difficulty Level | Key Chapters / Skills Evaluated | Common Student Pitfalls |
|---|---|---|---|
| खंड 'क' (अपठित बोध) | मध्यम से कठिन (Moderate to Tricky) | गूढ़ दार्शनिक गद्यांश, शब्दावली, शीर्षक चयन व विश्लेषणात्मक निष्कर्ष | गद्यांश के शब्दों को सीधे कॉपी करना; प्रतीकात्मक अर्थ को न समझ पाना। |
| खंड 'ख' (व्याकरण) | मध्यम (Moderate) | पदबंध, रचना के आधार पर वाक्य, समास विग्रह, मुहावरे | संज्ञा और विशेषण पदबंध में भ्रम; बहुव्रीहि और कर्मधारय समास के विग्रह में अंतर न कर पाना। |
| खंड 'ग' (साहित्य) | सरल से मध्यम (Direct to Analytic) | स्पर्श (पर्वत प्रदेश में पावस, मनुष्यता, बड़े भाई साहब, झेन की देन) और संचयन (हरिहर काका, टोपी शुक्ला) | पात्रों के चरित्र-चित्रण में मूल्यपरक बिंदुओं को छोड़ देना; शब्द-सीमा का उल्लंघन। |
| खंड 'घ' (रचनात्मक लेखन) | सरल (Easy scoring with format) | अनुच्छेद, औपचारिक पत्र, सूचना, विज्ञापन, ई-मेल लेखन | निर्धारित बॉक्स (Box) प्रारूप भूल जाना; पत्र के आरंभ व अंत की औपचारिक पंक्तियों में अशुद्ध वर्तनी। |
For literature, high weightage is consistently allocated to long-form evaluative questions from Harihar Kaka, Topi Shukla, and analytical poetry like Manushyata. Scoring in grammar depends entirely on pinpoint accuracy with zero subjective deduction.
How to Practice with This Sample Paper
To extract maximum value from this solved CBSE sample paper standard set, adopt a structured exam simulation routine:
- Simulate Exact Exam Conditions: Sit in an isolated room from 10:15 AM to 1:30 PM. Use the initial 15 minutes exclusively to read the unseen passages and plan your writing choices. Do not begin writing before 10:30 AM.
- Follow a Smart Time-Budgeting Strategy:
- Reading Section (खंड 'क'): 35 minutes
- Applied Grammar (खंड 'ख'): 20 minutes (high speed, 100% accuracy)
- Literature (खंड 'ग'): 65 minutes (structured, well-spaced answers)
- Writing Skills (खंड 'घ'): 45 minutes (neat formats, boxed advertisements, formal tone)
- Revision & Proofreading: 15 minutes (mandatory check for Matra and spelling errors)
- Conduct Strict Self-Assessment: Compare your responses with the provided solutions. Pay careful attention to the deductive parameters in writing: -0.5 marks for spelling errors, -1 mark for incomplete format in notices or letters, and lack of keywords in 3-mark literature questions.
- Maintain a Hindi 'Error Log' (त्रुटि पुस्तिका): Record frequently misspelled words (e.g., उज्ज्वल, कवयित्री, आशीर्वाद, परिस्थिति, संधारणीय) and re-solve any failed grammar questions 48 hours later.
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